Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.271.47: भीष्मजी कहते हैं - राजन! तत्पश्चात ब्राह्मण ने देखा कि वे सुखी पुरुष काम, क्रोध, लोभ, भय, मद, निद्रा, तन्द्रा और आलस्य आदि शत्रुओं से घिरे हुए हैं। | mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म उवाच
ततोऽपश्यत् स कामं च क्रोधं लोभं भयं मदम्।
निद्रां तन्द्रीं तथाऽऽलस्यमावृत्य पुरुषान् स्थितान्॥ ४७॥
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन! तत्पश्चात ब्राह्मण ने देखा कि वे सुखी पुरुष काम, क्रोध, लोभ, भय, मद, निद्रा, तन्द्रा और आलस्य आदि शत्रुओं से घिरे हुए हैं।
Bhishmaji says – King! Thereafter, the Brahmin saw that those happy men were surrounded by enemies like lust, anger, greed, fear, intoxication, sleep, drowsiness and laziness etc.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥