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mahabharat 12.271.46: देखो, एक बार फिर लोगों की दशा पर गौर करो । यह सब देखकर और सुनकर मनुष्य भोगों की इच्छा कैसे कर सकता है ? ऐसे लोगों के लिए, विशेषकर धन और भोगों में आसक्त लोगों के लिए, स्वर्ग का द्वार प्रायः बंद ही रहता है ॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  12.271.46 
पश्य पश्य च भूयस्त्वं कामानिच्छेत् कथं नर:।
स्वर्गद्वारं हि संरुद्धं मानुषेषु विशेषत:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
देखो, एक बार फिर लोगों की दशा पर गौर करो । यह सब देखकर और सुनकर मनुष्य भोगों की इच्छा कैसे कर सकता है ? ऐसे लोगों के लिए, विशेषकर धन और भोगों में आसक्त लोगों के लिए, स्वर्ग का द्वार प्रायः बंद ही रहता है ॥ 46॥
 
Look, look once again at the condition of the people. How can a man desire pleasures after seeing and hearing all this? The door to heaven is usually closed for such people, especially for those who are attached to wealth and pleasures. ॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)