Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.271.45: कुण्डधर ने कहा- ब्राह्मण! तुमने बड़ी श्रद्धा से मेरी पूजा की। इसके बावजूद यदि तुम धन पाकर भी दुःख भोगते रहते, तो मैं तुम्हारी क्या सहायता करता और तुम पर क्या उपकार करता? | mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुण्डधार उवाच
मां पूजयित्वा भावेन यदि त्वं दु:खमाप्नुया:।
कृतं मया भवेत् किं ते कश्च तेऽनुग्रहो भवेत्॥ ४५॥
अनुवाद
कुण्डधर ने कहा- ब्राह्मण! तुमने बड़ी श्रद्धा से मेरी पूजा की। इसके बावजूद यदि तुम धन पाकर भी दुःख भोगते रहते, तो मैं तुम्हारी क्या सहायता करता और तुम पर क्या उपकार करता?
Kunddhar said-Brahmin! You worshipped me with great devotion. Despite this, if you had continued to suffer after getting wealth, what help would I have done to you and what favour would I have bestowed on you.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥