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श्लोक  12.271.44 
ततो राजसहस्राणि मग्नानि निरये तदा।
दूरादपश्यद् विप्र: स दिव्ययुक्तेन चक्षुषा॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
तब ब्राह्मण ने दूर से ही अपने दिव्य नेत्रों से देखा कि हजारों राजा नरक में डूबे हुए हैं।
 
Then the Brahmin saw with his divine eyes from a distance that thousands of kings were drowned in hell. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)