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mahabharat 12.271.40h: "यदि मैं संतुष्ट होकर किसी को राज्य दे दूँ, तो वह शीघ्र ही राजा बन जाएगा। मेरा यह कथन कभी मिथ्या नहीं हो सकता।" ॥39 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.271.40h 
यदि दद्यामहं राज्यं तुष्टो वै यस्य कस्यचित्।
स भवेदचिराद् राजा न मिथ्या वाग् भवेन्मम।
 
 
अनुवाद
"यदि मैं संतुष्ट होकर किसी को राज्य दे दूँ, तो वह शीघ्र ही राजा बन जाएगा। मेरा यह कथन कभी मिथ्या नहीं हो सकता।" ॥39 1/2॥
 
"If I am satisfied and give the kingdom to anyone, he will soon become the king. This statement of mine can never be false." ॥ 39 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)