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mahabharat 12.271.40-42: भरतनन्दन! उसी समय ब्राह्मण की तपस्या और उसकी कृपा से प्रेरित होकर कुण्डधार ने उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन दिये। उनसे मिलकर ब्राह्मण ने विधिपूर्वक कुण्डधार की पूजा की। नरेश्वर! उन्हें देखकर ब्राह्मण को बड़ा आश्चर्य हुआ ॥40-42॥   |   mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा  »  श्लोक 40-42
 
 
श्लोक  12.271.40-42 
तस्य साक्षात् कुण्डधारो दर्शयामास भारत॥ ४०॥
ब्राह्मणस्य तपोयोगात् सौहृदेनाभिचोदित:॥ ४१॥
समागम्य स तेनाथ पूजां चक्रे यथाविधि।
ब्राह्मण: कुण्डधारस्य विस्मितश्चाभवन्नृप॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! उसी समय ब्राह्मण की तपस्या और उसकी कृपा से प्रेरित होकर कुण्डधार ने उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन दिये। उनसे मिलकर ब्राह्मण ने विधिपूर्वक कुण्डधार की पूजा की। नरेश्वर! उन्हें देखकर ब्राह्मण को बड़ा आश्चर्य हुआ ॥40-42॥
 
Bharatnandan! Meanwhile, inspired by the Brahmin's penance and his kindness towards him, Kundhadhar gave him direct darshan. Meeting him, the Brahmin worshiped the Kundhadhari ritually. Nareshwar! The Brahmin was very surprised to see him. 40-42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)