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mahabharat 12.271.4: ऐसा निश्चय करके वह भक्तिपूर्वक देवताओं की पूजा करने लगा, परन्तु देवताओं की पूजा करने पर भी उसे धन की प्राप्ति नहीं हुई।   |   mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.271.4 
स निश्चयमथो कृत्वा पूजयामास देवता:।
भक्त्या न चैवाध्यगच्छद् धनं सम्पूज्य देवता:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
ऐसा निश्चय करके वह भक्तिपूर्वक देवताओं की पूजा करने लगा, परन्तु देवताओं की पूजा करने पर भी उसे धन की प्राप्ति नहीं हुई।
 
Having decided this, he started worshipping the gods with devotion. But even after worshipping the gods, he could not get wealth. 4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)