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mahabharat 12.271.37: धर्म में आस्था रखते हुए तथा दीर्घकाल तक घोर तपस्या करते हुए उस ब्राह्मण को दिव्य दृष्टि प्राप्त हुई।   |   mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.271.37 
धर्मे च श्रद्दधानस्य तपस्युग्रे च वर्तत:।
कालेन महता तस्य दिव्या दृष्टिरजायत॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
धर्म में आस्था रखते हुए तथा दीर्घकाल तक घोर तपस्या करते हुए उस ब्राह्मण को दिव्य दृष्टि प्राप्त हुई।
 
Having faith in Dharma and being engaged in intense penance for a long time, that Brahmin attained divine sight.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)