Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.271.35-36: कुछ समय बाद उस ब्राह्मण ने फल-मूल सब त्याग दिए और केवल पत्ते खाकर रहने लगा। फिर उसने पत्ते भी त्याग दिए और केवल जल पर रहने लगा। तत्पश्चात, कई वर्षों तक वह केवल वायु पर ही रहा। फिर भी उसकी प्राणशक्ति क्षीण नहीं हुई, यह एक अद्भुत बात थी। 35-36 | mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुछ समय बाद उस ब्राह्मण ने फल-मूल सब त्याग दिए और केवल पत्ते खाकर रहने लगा। फिर उसने पत्ते भी त्याग दिए और केवल जल पर रहने लगा। तत्पश्चात, कई वर्षों तक वह केवल वायु पर ही रहा। फिर भी उसकी प्राणशक्ति क्षीण नहीं हुई, यह एक अद्भुत बात थी। 35-36
After some time, that Brahmin gave up all fruits and roots and started living only on leaves. Then he gave up leaves also and started living only on water. Thereafter, for many years, he lived only on air. Even then, his life force did not diminish, this was a wonderful thing. 35-36.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥