Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.271.34: देवताओं और अतिथियों को अर्पण करने के बाद वह बचे हुए फल-मूल आदि को स्वयं खाता था। महाराज! धर्म के विषय में उसकी बुद्धि अटल हो गई थी। 34. | mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवतातिथिशेषेण फलमूलाशनो द्विज:।
धर्मे चास्य महाराज दृढा बुद्धिरजायत॥ ३४॥
अनुवाद
देवताओं और अतिथियों को अर्पण करने के बाद वह बचे हुए फल-मूल आदि को स्वयं खाता था। महाराज! धर्म के विषय में उसकी बुद्धि अटल हो गई थी। 34.
After offering it to the gods and guests, he used to eat the remaining fruits and roots etc. Maharaj! His wisdom regarding religion had become unwavering. 34.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥