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भीष्म उवाच
निर्वेदाद् देवतानां च प्रसादात् स द्विजोत्तम:।
वनं प्रविश्य सुमहत् तप आरब्धवांस्तदा॥ ३३॥
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन ! उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने वैराग्य और देवताओं की कृपा से वन में जाकर उस समय घोर तप आरम्भ किया ॥33॥
Bhishmaji says – King! That great Brahmin, going into the forest with renunciation and the blessings of the Gods, began a severe penance at that time. 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥