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mahabharat 12.271.31: तत्पश्चात् उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने अपने पास बहुत से उत्तम वस्त्र (छाल आदि) रखे देखे, जिससे उसे बड़ा दुःख और वैराग्य हुआ।   |   mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.271.31 
ततोऽपश्यत चीराणि सूक्ष्माणि द्विजसत्तम:।
पार्श्वतोऽभ्याशतो न्यस्तान्यथ निर्वेदमागत:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने अपने पास बहुत से उत्तम वस्त्र (छाल आदि) रखे देखे, जिससे उसे बड़ा दुःख और वैराग्य हुआ।
 
Thereafter, that great Brahmin saw many fine pieces of cloth (bark etc.) kept near him. This caused him great sorrow and detachment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)