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mahabharat 12.271.30: युधिष्ठिर! इस प्रकार अन्यों के लिए अत्यंत दुर्लभ वर पाकर और अपना अभीष्ट प्राप्त करके वह मेघ अत्यंत प्रसन्न हुआ ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.271.30 
तत: प्रीतो जलधर: कृतकार्यो युधिष्ठिर।
ईप्सितं मनसो लब्ध्वा वरमन्यै: सुदुर्लभम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! इस प्रकार अन्यों के लिए अत्यंत दुर्लभ वर पाकर और अपना अभीष्ट प्राप्त करके वह मेघ अत्यंत प्रसन्न हुआ ॥30॥
 
Yudhishthira! Having thus received a boon which was very rare for others and having achieved his desired goal, that cloud became very happy. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)