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श्लोक  12.271.3 
अधनो ब्राह्मण: कश्चित् कामाद् धर्ममवैक्षत।
यज्ञार्थं सततोऽर्थार्थी तपोऽतप्यत दारुणम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
एक बार एक गरीब ब्राह्मण ने स्वार्थवश धार्मिक कार्य करने का विचार किया। उसे यज्ञ करने के लिए धन की आवश्यकता थी, इसलिए उसने कठोर तपस्या शुरू कर दी।
 
Once a poor Brahmin thought of performing religious duties with a selfish motive. He always desired money to perform a sacrifice, so he started performing very severe penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)