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mahabharat 12.271.23: युधिष्ठिर! परन्तु कुण्डधार ने यह जानकर कि मनुष्य जीवन चंचल और अस्थिर है, उस ब्राह्मण की भी तपशक्ति बढ़ाने का निश्चय किया॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.271.23 
विचार्य कुण्डधारस्तु मानुष्यं चलमध्रुवम्।
तपसे मतिमाधत्त ब्राह्मणस्य युधिष्ठिर॥ २३॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! परन्तु कुण्डधार ने यह जानकर कि मनुष्य जीवन चंचल और अस्थिर है, उस ब्राह्मण की भी तपशक्ति बढ़ाने का निश्चय किया॥ 23॥
 
Yudhishthira! But Kundadhara, realizing that human life is fickle and unstable, decided to increase the austerity power of that Brahmin as well.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)