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mahabharat 12.271.18: तब देवताओं के कहने पर महाहृदयी मणिभद्र ने पृथ्वी पर लेटे हुए मेघ से पूछा - 'कुण्डधर! तुम क्या चाहते हो?'॥18॥   |   mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.271.18 
ततस्तु देववचनान्मणिभद्रो महामना:।
उवाच पतितं भूमौ कुण्डधार किमिष्यते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तब देवताओं के कहने पर महाहृदयी मणिभद्र ने पृथ्वी पर लेटे हुए मेघ से पूछा - 'कुण्डधर! तुम क्या चाहते हो?'॥18॥
 
Then, at the behest of the gods, the great-hearted Manibhadra asked the cloud lying on the earth, 'Kundadhar! What do you want?'॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)