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mahabharat 12.271.16: वहाँ देवता साधकों को उनके शुभ कर्मों के बदले में राज्य और धन आदि दे रहे थे और अशुभ कर्मों का फल प्रकट होने पर पहले दिए गए राज्य आदि को छीन ले रहे थे॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.271.16 
तत्र देवा: प्रयच्छन्ति राज्यानि च धनानि च।
शुभै: कर्मभिरारब्धा: प्रच्छिन्दन्त्यशुभेषु च॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ देवता साधकों को उनके शुभ कर्मों के बदले में राज्य और धन आदि दे रहे थे और अशुभ कर्मों का फल प्रकट होने पर पहले दिए गए राज्य आदि को छीन ले रहे थे॥16॥
 
There the gods were giving kingdoms and wealth etc. to the seekers in return of their good deeds, and when the result of inauspicious deeds appeared, they were taking away the kingdom etc. given earlier.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)