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mahabharat 12.271.13: तत्पश्चात् वह ब्राह्मण कुश के तेज से प्रेरित होकर कुश की शय्या पर सो गया और स्वप्न में उसने सम्पूर्ण प्राणियों को देखा ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.271.13 
तत: स ब्राह्मण: स्वप्ने कुण्डधारस्य तेजसा।
अपश्यत् सर्वभूतानि कुशेषु शयितस्तदा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह ब्राह्मण कुश के तेज से प्रेरित होकर कुश की शय्या पर सो गया और स्वप्न में उसने सम्पूर्ण प्राणियों को देखा ॥13॥
 
Thereafter, that Brahmin, inspired by the glory of the pot holder, slept on the bed of Kusho and in his dream he saw all the living beings. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)