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mahabharat 12.271.10: इससे मेघ कुछ ही देर में संतुष्ट हो गया और उसने ब्राह्मण की सहायता करने की अपनी नित्य प्रवृत्ति को दर्शाते हुए निम्नलिखित वचन कहे - ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.271.10 
ततस्त्वल्पेन कालेन तुष्टो जलधरस्तदा।
तस्योपकारनियतामिमां वाचमुवाच ह॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इससे मेघ कुछ ही देर में संतुष्ट हो गया और उसने ब्राह्मण की सहायता करने की अपनी नित्य प्रवृत्ति को दर्शाते हुए निम्नलिखित वचन कहे - ॥10॥
 
Due to this the cloud became satisfied in a short time and he said the following words indicating his regular inclination towards helping the brahmin - ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)