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mahabharat 12.270.7: वे किसी पर क्रोध नहीं करते, किसी पर कुदृष्टि नहीं रखते, अहंकार और स्वार्थ से दूर रहते हैं, ज्ञान के साधनों में उनकी भक्ति होती है, उनका जन्म, कर्म और ज्ञान- तीनों ही शुद्ध होते हैं और वे समस्त प्राणियों के हित के लिए तत्पर रहते हैं॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.270.7 
अक्रुध्यन्तोऽनसूयन्तो निरहङ्कारमत्सरा:।
ज्ञाननिष्ठास्त्रिशुक्लाश्च सर्वभूतहिते रता:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वे किसी पर क्रोध नहीं करते, किसी पर कुदृष्टि नहीं रखते, अहंकार और स्वार्थ से दूर रहते हैं, ज्ञान के साधनों में उनकी भक्ति होती है, उनका जन्म, कर्म और ज्ञान- तीनों ही शुद्ध होते हैं और वे समस्त प्राणियों के हित के लिए तत्पर रहते हैं॥7॥
 
They do not get angry at anyone, do not hold any evil eye, stay away from ego and selfishness, they have devotion in the means of knowledge, their birth, actions and knowledge – all three are pure and they remain ready for the benefit of all living beings. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)