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mahabharat 12.270.42: जो वेदों को तथा उनके द्वारा जाने जाने वाले परब्रह्म को जानता है, वह वेदवेत्ता कहलाता है। उसके अतिरिक्त अन्य लोग अपने मुख से वेदों का उच्चारण नहीं करते, वे केवल धौंकनी के समान वायु फूँकते हैं॥ 42॥   |   mahabharat अध्याय 12.270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.270.42 
वेदांश्च वेदितव्यं च विदित्वा च यथास्थितिम्।
एवं वेदविदित्याहुरतोऽन्यो वातरेचक:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जो वेदों को तथा उनके द्वारा जाने जाने वाले परब्रह्म को जानता है, वह वेदवेत्ता कहलाता है। उसके अतिरिक्त अन्य लोग अपने मुख से वेदों का उच्चारण नहीं करते, वे केवल धौंकनी के समान वायु फूँकते हैं॥ 42॥
 
He who knows the Vedas and the Supreme Brahman which can be known through them is called a Vedavetta. Others, other than him, do not recite the Vedas with their mouths, they only blow out air like a bellows.॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)