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mahabharat 12.270.41: जिस गति से विप्र सब ओर से शान्त, संतुष्ट, शुद्ध मन और ज्ञान को प्राप्त करता है, उसे परमगति कहते हैं ॥41॥   |   mahabharat अध्याय 12.270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.270.41 
यां विप्रा: सर्वत: शान्ता विशुद्धा ज्ञाननिश्चया:।
गतिं गच्छन्ति संतुष्टास्तामाहु: परमां गतिम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
जिस गति से विप्र सब ओर से शान्त, संतुष्ट, शुद्ध मन और ज्ञान को प्राप्त करता है, उसे परमगति कहते हैं ॥41॥
 
The speed by which Vipra attains calm, satisfied, pure mind and knowledge from all sides is called Paramgati. 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)