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mahabharat 12.270.35: कपिलजी बोले - सात्विक गुण से उत्पन्न सभी सम्पत्तियाँ शुभ हैं; किन्तु इनमें से कोई भी त्याग में मिलने वाले सुख को प्राप्त नहीं कर सकती। तुम भी इसे देखो। 35.   |   mahabharat अध्याय 12.270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.270.35 
कपिल उवाच
परिग्रहा: शुभा: सर्वे गुणतोऽभ्युदयाश्च ये।
न तु त्यागसुखं प्राप्ता एतत् त्वमपि पश्यसि॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
कपिलजी बोले - सात्विक गुण से उत्पन्न सभी सम्पत्तियाँ शुभ हैं; किन्तु इनमें से कोई भी त्याग में मिलने वाले सुख को प्राप्त नहीं कर सकती। तुम भी इसे देखो। 35.
 
Kapilji said - All the possessions which have been manifested from the Sattvik Guna are auspicious; but none of these can attain the happiness that is found in renunciation. You too see this. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)