Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.270.33-34: सुमरस्मिनि ने पूछा - "ब्राह्मण! जो लोग केवल अपने द्वारा अर्जित धन का उपभोग करते हैं, जो दान देते हैं, जो उसे यज्ञों में लगाते हैं, जो स्वयं अध्ययन करते हैं या जो संन्यास मार्ग अपनाते हैं, इनमें से कौन पुरुष मृत्यु के बाद स्वर्ग को जीतता है? मैं जिज्ञासावश यह पूछ रही हूँ; कृपया मुझे यह सब विस्तारपूर्वक बताइये।" 33-34 | mahabharat अध्याय 12.270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्यूमरश्मिरुवाच
ये भुञ्जते ये ददते यजन्तेऽधीयते च ये।
मात्राभिरुपलब्धाभिर्ये वा त्यागं समाश्रिता:॥ ३३॥
एतेषां प्रेत्यभावे तु कतम: स्वर्गजित्तम:।
एतदाचक्ष्व मे ब्रह्मन् यथातत्त्वेन पृच्छत:॥ ३४॥
अनुवाद
सुमरस्मिनि ने पूछा - "ब्राह्मण! जो लोग केवल अपने द्वारा अर्जित धन का उपभोग करते हैं, जो दान देते हैं, जो उसे यज्ञों में लगाते हैं, जो स्वयं अध्ययन करते हैं या जो संन्यास मार्ग अपनाते हैं, इनमें से कौन पुरुष मृत्यु के बाद स्वर्ग को जीतता है? मैं जिज्ञासावश यह पूछ रही हूँ; कृपया मुझे यह सब विस्तारपूर्वक बताइये।" 33-34
Sumarasmini asked, "Brahmin! Those who enjoy the wealth acquired by them only, those who give charity, those who use it in sacrifices, those who study on their own or those who adopt the path of renunciation, who among these men primarily conquers the heaven after death? I am asking this out of curiosity; please tell me all this in detail." 33-34.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥