Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.270.32: यह तप चाहे अन्य आश्रमों के धर्मों से मिश्रित हो अथवा स्वतंत्र, जो अपनी वैराग्य शक्ति के अनुसार इसका आश्रय लेते हैं, उनका कल्याण होता है। इस मार्ग पर चलने वाले सभी यात्री परम कल्याण को प्राप्त होते हैं; किन्तु जो दुर्बल है, जो मन और इन्द्रियों को वश में न कर पाने के कारण इसका अभ्यास नहीं कर पाता, वह यहाँ विश्रामपूर्वक बैठता है। जो बाहर और भीतर से शुद्ध है, वह ब्रह्मपद का अनुसंधान करके संसार के बंधन से मुक्त हो जाता है। 32। | mahabharat अध्याय 12.270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह तप चाहे अन्य आश्रमों के धर्मों से मिश्रित हो अथवा स्वतंत्र, जो अपनी वैराग्य शक्ति के अनुसार इसका आश्रय लेते हैं, उनका कल्याण होता है। इस मार्ग पर चलने वाले सभी यात्री परम कल्याण को प्राप्त होते हैं; किन्तु जो दुर्बल है, जो मन और इन्द्रियों को वश में न कर पाने के कारण इसका अभ्यास नहीं कर पाता, वह यहाँ विश्रामपूर्वक बैठता है। जो बाहर और भीतर से शुद्ध है, वह ब्रह्मपद का अनुसंधान करके संसार के बंधन से मुक्त हो जाता है। 32।
Whether this asceticism is mixed with the religions of other ashramas or independent, those who take shelter of it according to the strength of their detachment, are destined for welfare. All the travelers who go on this path attain supreme welfare; but the one who is weak, who is unable to practice it due to not being able to control the mind and the senses, he sits here in a relaxed state. He who is pure from outside and inside, he becomes free from the bondage of the world by researching the state of Brahma. 32.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥