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चतुर्थोपनिषद् धर्म: साधारण इति स्मृति:।
संसिद्धै: साध्यते नित्यं ब्राह्मणैर्नियतात्मभि:॥ ३०॥
अनुवाद
तुरीय ब्रह्म से संबंधित उपनिषद्-विद्या, उसकी प्राप्ति में सहायक संयम, त्याग, धैर्य, श्रद्धा और संकल्प रूपी धर्म सभी वर्णों और आश्रमों के लोगों के लिए समान है - ऐसा स्मृति का कथन है। परंतु केवल अनुशासित, तपस्वी और ब्रह्मनिष्ठ ही उस धर्म का सदैव पालन करने में समर्थ हैं।
The Upanishad-vidya related to the Turiya Brahman, the Dharma of self-control, self-denial, patience, faith and resolution that help to achieve it, are common for people of all castes and ashrams - this is the statement of the Smriti. But only those who are disciplined and have austerity and are devoted to Brahman, are able to always practice that Dharma. 30.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥