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mahabharat 12.270.27: इसी प्रकार जो ब्रह्मचारी सदैव गुरु की सेवा में तत्पर रहता है, ब्रह्मचर्य परायण है, दृढ़ निश्चयी है और योगयुक्त है, वही श्रेष्ठ ब्राह्मण है। उसके अतिरिक्त अन्य प्रकार के ब्राह्मण निम्न श्रेणी के या नाममात्र के ब्राह्मण माने जाते हैं। 27॥   |   mahabharat अध्याय 12.270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.270.27 
एवमेव ब्रह्मचारी शुश्रूषुर्घोरनिश्चय:।
एवं युक्तो ब्राह्मण: स्यादन्यो ब्राह्मणको भवेत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार जो ब्रह्मचारी सदैव गुरु की सेवा में तत्पर रहता है, ब्रह्मचर्य परायण है, दृढ़ निश्चयी है और योगयुक्त है, वही श्रेष्ठ ब्राह्मण है। उसके अतिरिक्त अन्य प्रकार के ब्राह्मण निम्न श्रेणी के या नाममात्र के ब्राह्मण माने जाते हैं। 27॥
 
Similarly, only a celibate who is always ready to serve his Guru, is devoted to celibacy, has strong determination and has yoga as the best Brahmin. Apart from that, other types of Brahmins are considered to be low class or nominal Brahmins. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)