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श्लोक  12.270.22 
सर्ववर्णेषु जातेषु नासीत् कश्चिद् व्यतिक्रम:।
व्यस्तमेकं चतुर्धा हि ब्राह्मणा आश्रमं विदु:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में जब सब वर्णों की सृष्टि हुई, तब आश्रम के विषय में कोई भेद नहीं था। तत्पश्चात् वही आश्रम आयु के आधार पर चार भागों में विभक्त हो गया। यह बात सभी ब्राह्मण जानते थे॥ 22॥
 
In the past, when all the Varnas (castes) were created, there was no difference in the matter of Ashrama. Thereafter, the same Ashrama was divided into four parts based on the age. All the Brahmins knew this.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)