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mahabharat 12.270.21: बहुत से लोग धर्मों की सूक्ष्मताओं का पालन करने में असमर्थ हो जाते हैं। वास्तव में वेदविहित आचरण और धर्म आपत्तियों से रहित है। उसमें न तो प्रमाद है और न ही असफलता॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 12.270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.270.21 
अशक्नुवद्भिश्चरितुं किंचिद् धर्मेषु सूक्ष्मताम्।
निरापद्धर्म आचारो ह्यप्रमादोऽपराभव:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
बहुत से लोग धर्मों की सूक्ष्मताओं का पालन करने में असमर्थ हो जाते हैं। वास्तव में वेदविहित आचरण और धर्म आपत्तियों से रहित है। उसमें न तो प्रमाद है और न ही असफलता॥ 21॥
 
Many people become incapable of practising the slight subtleties in the religions. In reality, the conduct and religion prescribed by the Vedas is free from objections. There is neither negligence nor failure in it.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)