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mahabharat 12.270.19: उनका हृदय अत्यंत उदार था, उनका आचरण और कर्म दूसरों के लिए अनुकरणीय नहीं थे, इसलिए उनके सभी पुण्य कर्म अनंत मोक्ष के रूप में फलित हुए। ऐसा हम सदैव सुनते आए हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.270.19 
सर्वमानन्त्यमेवासीदिति न: शाश्वती श्रुति:।
तेषामदीनसत्त्वानां दुश्चराचारकर्मणाम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उनका हृदय अत्यंत उदार था, उनका आचरण और कर्म दूसरों के लिए अनुकरणीय नहीं थे, इसलिए उनके सभी पुण्य कर्म अनंत मोक्ष के रूप में फलित हुए। ऐसा हम सदैव सुनते आए हैं।
 
His heart was very generous, his conduct and deeds were very difficult for others to imitate, hence all his good deeds were fruitful in the form of everlasting salvation. We have always heard this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)