Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.270.14: जो शुद्ध हृदय वाले मनुष्य उस परम धर्म में स्थित हैं, उनके लिए कोई प्रायश्चित नहीं है। ऐसा सुना जाता है कि दुर्बल हृदय वाले ही पाप करते हैं और प्रायश्चित उन्हीं के लिए निर्धारित किया गया है॥14॥ | mahabharat अध्याय 12.270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मिन् विधौ स्थितानां हि प्रायश्चित्तं न विद्यते।
दुर्बलात्मन उत्पन्नं प्रायश्चित्तमिति श्रुति:॥ १४॥
अनुवाद
जो शुद्ध हृदय वाले मनुष्य उस परम धर्म में स्थित हैं, उनके लिए कोई प्रायश्चित नहीं है। ऐसा सुना जाता है कि दुर्बल हृदय वाले ही पाप करते हैं और प्रायश्चित उन्हीं के लिए निर्धारित किया गया है॥14॥
There is no atonement for those pure-hearted people who are situated in that supreme category of religion. It is heard that only those who have a weak heart commit sins and atonement has been prescribed for them only.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥