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mahabharat 12.270.13: वे सब लोग एक साथ रहते थे और उत्तम कोटि का धर्म मानते थे; इसलिए उन्हें कभी तपस्या करने का अवसर नहीं मिला ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.270.13 
य एव प्रथम: कल्पस्तमेवाभ्याचरन् सह।
तेषां नासीद् विधातव्यं प्रायश्चित्तं कदाचन॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वे सब लोग एक साथ रहते थे और उत्तम कोटि का धर्म मानते थे; इसलिए उन्हें कभी तपस्या करने का अवसर नहीं मिला ॥13॥
 
All of them lived together and followed what was considered to be the first class religion; therefore they never had the opportunity to do penance. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)