Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.270.10-11: वे पहले आवश्यक नियमों का पालन करके अपने मन को शुद्ध करते थे और जब उन्हें कठिनाइयाँ और दुर्गम स्थान मिलते थे, तब भी वे एक साथ मिलकर धार्मिक अनुष्ठान करने में तत्पर रहते थे। जो पूर्व पुरुष समूह में धार्मिक अनुष्ठान करते थे, उन्हें उसमें सुख का अनुभव होता था। उन्हें किसी प्रकार का प्रायश्चित नहीं करना पड़ता था।॥10-11॥ | mahabharat अध्याय 12.270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे पहले आवश्यक नियमों का पालन करके अपने मन को शुद्ध करते थे और जब उन्हें कठिनाइयाँ और दुर्गम स्थान मिलते थे, तब भी वे एक साथ मिलकर धार्मिक अनुष्ठान करने में तत्पर रहते थे। जो पूर्व पुरुष समूह में धार्मिक अनुष्ठान करते थे, उन्हें उसमें सुख का अनुभव होता था। उन्हें किसी प्रकार का प्रायश्चित नहीं करना पड़ता था।॥10-11॥
They first purified their minds by following the necessary rules and even when they faced difficulties and difficult places, they remained ready to perform religious rituals together. Those earlier men who performed religious rituals in a group used to experience happiness in it. They did not have to do any kind of atonement.॥10-11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥