Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.270.1: कपिल बोले - सुमेरश्मे! वेद सम्पूर्ण जगत के लिए प्रमाण हैं। अतः वेदों की अवहेलना नहीं की गई है। ब्रह्म के दो रूप समझने चाहिए - शब्दब्रह्म (वेद) और परब्रह्म (सच्चिदानन्दघन परमात्मा)। 1॥   |   mahabharat अध्याय 12.270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 270: स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद—चारों आश्रमोंमें उत्तम साधनोंके द्वारा ब्रह्मकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.270.1 
कपिल उवाच
वेदा: प्रमाणं लोकानां न वेदा: पृष्ठत: कृता:।
द्वे ब्रह्मणी वेदितव्ये शब्दब्रह्म परं च यत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
कपिल बोले - सुमेरश्मे! वेद सम्पूर्ण जगत के लिए प्रमाण हैं। अतः वेदों की अवहेलना नहीं की गई है। ब्रह्म के दो रूप समझने चाहिए - शब्दब्रह्म (वेद) और परब्रह्म (सच्चिदानन्दघन परमात्मा)। 1॥
 
Kapil said – Sumerashme! Vedas are the proof for the entire world. Therefore, the Vedas have not been disregarded. Two forms of Brahma should be understood – ShabdaBrahm (Veda) and ParaBrahm (Sachchidanandaghan Paramatma). 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)