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mahabharat 12.27.30-31h: समस्त संग्रहों का अंत विनाश है, समस्त उन्नति का अंत पतन है, संयोगों का अंत वियोग है और जीवन का अंत मृत्यु है ॥30 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.27: युधिष्ठिरको शोकवश शरीर त्याग देनेके लिये उद्यत देख व्यासजीका उन्हें उससे निवारण करके समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 27: युधिष्ठिरको शोकवश शरीर त्याग देनेके लिये उद्यत देख व्यासजीका उन्हें उससे निवारण करके समझाना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  12.27.30-31h 
सर्वे क्षयान्ता निचया: पतनान्ता: समुच्छ्रया:॥ ३०॥
संयोगा विप्रयोगान्ता मरणान्तं हि जीवितम्।
 
 
अनुवाद
समस्त संग्रहों का अंत विनाश है, समस्त उन्नति का अंत पतन है, संयोगों का अंत वियोग है और जीवन का अंत मृत्यु है ॥30 1/2॥
 
The end of all collections is destruction, the end of all progress is downfall, the end of unions is separation and the end of life is death. ॥ 30 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)