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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 27: युधिष्ठिरको शोकवश शरीर त्याग देनेके लिये उद्यत देख व्यासजीका उन्हें उससे निवारण करके समझाना
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श्लोक 28-29h
श्लोक
12.27.28-29h
व्यास उवाच
अतिवेलं महाराज न शोकं कर्तुमर्हसि॥ २८॥
पुनरुक्तं तु वक्ष्यामि दिष्टमेतदिति प्रभो।
अनुवाद
व्यास बोले, "महाराज! आप अधिक शोक न करें। प्रभु! मैं वही बात दोहरा रहा हूँ जो मैंने पहले कही थी। यह सब भाग्य का खेल है।"
Vyasa said, "Maharaj! Do not grieve too much. Prabhu! I am repeating what I said earlier. All this is the play of destiny." 28 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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