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mahabharat 12.27.25-26h: हे तपस्वियों! अब मैं न तो अन्न खाऊँगा और न ही जल पीऊँगा। यहीं रहकर अपने प्राणों को सुखा दूँगा।   |   mahabharat अध्याय 12.27: युधिष्ठिरको शोकवश शरीर त्याग देनेके लिये उद्यत देख व्यासजीका उन्हें उससे निवारण करके समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 27: युधिष्ठिरको शोकवश शरीर त्याग देनेके लिये उद्यत देख व्यासजीका उन्हें उससे निवारण करके समझाना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  12.27.25-26h 
न भोक्ष्ये न च पानीयमुपभोक्ष्ये कथञ्चन॥ २५॥
शोषयिष्ये प्रियान् प्राणानिहस्थोऽहं तपोधना:।
 
 
अनुवाद
हे तपस्वियों! अब मैं न तो अन्न खाऊँगा और न ही जल पीऊँगा। यहीं रहकर अपने प्राणों को सुखा दूँगा।
 
O ascetics! Now I will neither eat food nor drink water in any way. I will stay here and dry up my dear life. 25 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)