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mahabharat 12.27.24-25h: आप सभी मुझे अपने गुरु का हत्यारा समझें, जो मृत्युपर्यन्त भूख हड़ताल पर है, ताकि अगले जन्म में अपने कुल का नाश न करूँ। 24 1/2   |   mahabharat अध्याय 12.27: युधिष्ठिरको शोकवश शरीर त्याग देनेके लिये उद्यत देख व्यासजीका उन्हें उससे निवारण करके समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 27: युधिष्ठिरको शोकवश शरीर त्याग देनेके लिये उद्यत देख व्यासजीका उन्हें उससे निवारण करके समझाना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  12.27.24-25h 
प्रायोपविष्टं जानीध्वमथ मां गुरुघातिनम्॥ २४॥
जातिष्वन्यास्वपि यथा न भवेयं कुलान्तकृत्।
 
 
अनुवाद
आप सभी मुझे अपने गुरु का हत्यारा समझें, जो मृत्युपर्यन्त भूख हड़ताल पर है, ताकि अगले जन्म में अपने कुल का नाश न करूँ। 24 1/2
 
You all should think of me as a killer of my Guru, who is on a hunger strike till death, so that I may not destroy my clan in my next birth. 24 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)