Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.27.22-23h: जैसे पृथ्वी पाँच पर्वतों से रहित हो जाती, वैसे ही मैं द्रौपदी के लिए निरन्तर शोक में रहता हूँ, जो अपने पाँच पुत्रों से रहित होने के कारण शोक से व्याकुल हो रही है। | mahabharat अध्याय 12.27: युधिष्ठिरको शोकवश शरीर त्याग देनेके लिये उद्यत देख व्यासजीका उन्हें उससे निवारण करके समझाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे पृथ्वी पाँच पर्वतों से रहित हो जाती, वैसे ही मैं द्रौपदी के लिए निरन्तर शोक में रहता हूँ, जो अपने पाँच पुत्रों से रहित होने के कारण शोक से व्याकुल हो रही है।
Just as the earth would be devoid of five mountains, similarly I remain in constant grief for Draupadi who is distraught with grief after being devoid of her five sons.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥