Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.27.15-16: उस समय गुरु ने मुझसे पूछा था, ‘हे राजन! मुझे सच-सच बताइए, क्या मेरा पुत्र जीवित है?’ उस ब्राह्मण ने सत्य का निर्णय करने के लिए ही मुझसे यह प्रश्न पूछा था। जब भी मुझे उनके वचन याद आते हैं, तो मेरा सारा शरीर शोक की अग्नि से जलने लगता है। 15-16. | mahabharat अध्याय 12.27: युधिष्ठिरको शोकवश शरीर त्याग देनेके लिये उद्यत देख व्यासजीका उन्हें उससे निवारण करके समझाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तन्मे दहति गात्राणि यन्मां गुरुरभाषत॥ १५॥
सत्यमाख्याहि राजंस्त्वं यदि जीवति मे सुत:।
सत्यमामर्षयन् विप्रो मयि तत् परिपृष्टवान्॥ १६॥
अनुवाद
उस समय गुरु ने मुझसे पूछा था, ‘हे राजन! मुझे सच-सच बताइए, क्या मेरा पुत्र जीवित है?’ उस ब्राह्मण ने सत्य का निर्णय करने के लिए ही मुझसे यह प्रश्न पूछा था। जब भी मुझे उनके वचन याद आते हैं, तो मेरा सारा शरीर शोक की अग्नि से जलने लगता है। 15-16.
At that time the Guru had asked me, 'O King! Tell me the truth, is my son alive?' That Brahmin had asked me this question only to decide the truth. Whenever I remember his words, my whole body starts burning with the fire of grief. 15-16.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥