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mahabharat 12.27.13-14h: जिन्होंने बचपन से ही हमारा पालन-पोषण किया और सब प्रकार से हमारी रक्षा की, उन पापी, बल-लोभी, गुरु-हत्यारे और मूर्ख ने ही क्षणिक राज्य के लिए उन्हें मरवा डाला॥13/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.27: युधिष्ठिरको शोकवश शरीर त्याग देनेके लिये उद्यत देख व्यासजीका उन्हें उससे निवारण करके समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 27: युधिष्ठिरको शोकवश शरीर त्याग देनेके लिये उद्यत देख व्यासजीका उन्हें उससे निवारण करके समझाना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  12.27.13-14h 
येन संवर्धिता बाला येन स्म परिरक्षिता:।
स मया राज्यलुब्धेन पापेन गुरुघातिना॥ १३॥
अल्पकालस्य राज्यस्य कृते मूढेन घातित:।
 
 
अनुवाद
जिन्होंने बचपन से ही हमारा पालन-पोषण किया और सब प्रकार से हमारी रक्षा की, उन पापी, बल-लोभी, गुरु-हत्यारे और मूर्ख ने ही क्षणिक राज्य के लिए उन्हें मरवा डाला॥13/2॥
 
The one who brought us up since childhood and protected us in every way, I, a sinner, power-hungry, guru-killer and fool, got them killed for the sake of a short-lived kingdom. ॥ 13/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)