Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.269.51: यह तो सर्वविदित है कि आप विद्वान हैं। आप सब प्रकार से स्वस्थ भी हैं; परंतु क्या आपमें से किसी ने कभी एकत्व प्राप्त किया है? (जब एकमात्र अद्वितीय आत्मा अर्थात् ब्रह्म का अस्तित्व सर्वत्र अनुभव होने लगता है, तब उसे एकत्व ज्ञान कहते हैं।)॥51॥ | mahabharat अध्याय 12.269: प्रवृत्ति एवं निवृत्तिमार्गके विषयमें स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भवन्तो ज्ञानिनो व्यक्तं सर्वतश्च निरामया:।
ऐकात्म्यं नाम कश्चिद्धि कदाचिदुपपद्यते॥ ५१॥
अनुवाद
यह तो सर्वविदित है कि आप विद्वान हैं। आप सब प्रकार से स्वस्थ भी हैं; परंतु क्या आपमें से किसी ने कभी एकत्व प्राप्त किया है? (जब एकमात्र अद्वितीय आत्मा अर्थात् ब्रह्म का अस्तित्व सर्वत्र अनुभव होने लगता है, तब उसे एकत्व ज्ञान कहते हैं।)॥51॥
It is well known that you are learned. You are also healthy in all respects; but has any one of you ever attained oneness? (When the existence of the one and only unique Self, that is, Brahma, starts being realized everywhere, then it is called the knowledge of oneness.)॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥