Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.269.31: जो मुनि शीत और उष्ण जैसे द्वन्द्वों से युक्त उद्यानों में सुखपूर्वक एकान्त में निवास करता है तथा दूसरों का चिन्तन नहीं करता, उसे देवता ब्राह्मण (ब्रह्म को जानने वाला) मानते हैं। | mahabharat अध्याय 12.269: प्रवृत्ति एवं निवृत्तिमार्गके विषयमें स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मुनि शीत और उष्ण जैसे द्वन्द्वों से युक्त उद्यानों में सुखपूर्वक एकान्त में निवास करता है तथा दूसरों का चिन्तन नहीं करता, उसे देवता ब्राह्मण (ब्रह्म को जानने वाला) मानते हैं।
The sage who lives happily alone in the gardens full of dualities like cold and heat and does not think of others, is considered by the gods as a Brahmin (knower of Brahman). 31.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥