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mahabharat 12.269.27: वीर युधिष्ठिर! केवल अपनी पत्नी के साथ रहो, परस्त्री के साथ नहीं। जब तक पत्नी रजस्वला न हो जाए, तब तक उसे संभोग के लिए मत बुलाओ और मन ही मन एकपत्नीव्रत का व्रत लो। ऐसा करने से उसके गुप्त अंगों की रक्षा हो सकती है॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 12.269: प्रवृत्ति एवं निवृत्तिमार्गके विषयमें स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 269: प्रवृत्ति एवं निवृत्तिमार्गके विषयमें स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.269.27 
न वीर पत्नीं विहरेत नारीं
न चापि नारीमनृतावाह्वयीत।
भार्याव्रतं ह्यात्मनि धारयीत
तथास्योपस्थद्वारगुप्तिर्भवेत॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वीर युधिष्ठिर! केवल अपनी पत्नी के साथ रहो, परस्त्री के साथ नहीं। जब तक पत्नी रजस्वला न हो जाए, तब तक उसे संभोग के लिए मत बुलाओ और मन ही मन एकपत्नीव्रत का व्रत लो। ऐसा करने से उसके गुप्त अंगों की रक्षा हो सकती है॥ 27॥
 
Brave Yudhishthira! Live only with your wife, not with another woman. Do not call your wife for intercourse unless she has menstruated and take a vow of monogamy in your mind. By doing so, her private parts can be protected.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)