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mahabharat 12.269.17: निकम्मे और आलसी विद्वानों ने यह मान्यता प्रचारित कर दी है कि कर्मों के त्याग से मोक्ष प्राप्त होता है। यह बात सुनने में भले ही सत्य लगे, पर है असत्य। इस मार्ग पर चलने वाले किसी भी व्यक्ति को वेदों के सिद्धांतों का लेशमात्र भी ज्ञान नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 12.269: प्रवृत्ति एवं निवृत्तिमार्गके विषयमें स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 269: प्रवृत्ति एवं निवृत्तिमार्गके विषयमें स्यूमरश्मि-कपिल-संवाद  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.269.17 
श्रिया विहीनैरलसै: पण्डितै: सम्प्रवर्तितम्।
वेदवादापरिज्ञानं सत्याभासमिवानृतम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
निकम्मे और आलसी विद्वानों ने यह मान्यता प्रचारित कर दी है कि कर्मों के त्याग से मोक्ष प्राप्त होता है। यह बात सुनने में भले ही सत्य लगे, पर है असत्य। इस मार्ग पर चलने वाले किसी भी व्यक्ति को वेदों के सिद्धांतों का लेशमात्र भी ज्ञान नहीं है।
 
The poor and lazy scholars have propagated the belief that salvation is achieved by giving up actions. This may sound true but it is false. No one on this path has even the slightest knowledge of the principles of the Vedas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)