श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.268.8 
स बुद्धिमुत्तमां प्राप्तो नैष्ठिकीमकुतोभयाम्।
सतीमशिथिलां सत्यां वेदा३ इत्यब्रवीत् सकृत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तब उत्तम, निर्भय, स्थिर, सत्यनिष्ठ, परोपकारी और उत्साही बुद्धि प्राप्त महर्षि कपिल ने एक बार केवल इतना ही कहा - हे वेद! (कि लोग तुम्हारे नाम से ऐसे अनैतिक कर्म करते हैं)॥8॥
 
Then Maharishi Kapil, who had attained a perfect, fearless, steady, truthful, benevolent and enthusiastic intellect, said only this much once - Oh Veda! (that people commit such immoral acts in your name)॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)