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mahabharat 12.268.40: यह निश्चित है कि जो लोग यज्ञ नहीं करते, उनके लिए न तो यह लोक सुखदायक है और न ही स्वर्ग। जो लोग वेदों में वर्णित विषयों के जानकार हैं, वे कर्म और निवृत्ति दोनों को ही प्रमाण मानते हैं।॥40॥   |   mahabharat अध्याय 12.268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.268.40 
नायं लोकोऽस्त्ययज्ञानां परश्चेति विनिश्चय:।
वेदवादविदश्चैव प्रमाणमुभयं तदा॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
यह निश्चित है कि जो लोग यज्ञ नहीं करते, उनके लिए न तो यह लोक सुखदायक है और न ही स्वर्ग। जो लोग वेदों में वर्णित विषयों के जानकार हैं, वे कर्म और निवृत्ति दोनों को ही प्रमाण मानते हैं।॥40॥
 
It is certain that neither this world nor heaven is pleasurable to those who do not perform sacrifices. Those who are knowledgeable about the subjects mentioned in the Vedas consider both action and retirement as proof. ॥ 40॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि गोकपिलीये अष्टषष्टॺधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २६८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें गोकपिलीयोपाख्यानविषयक दो सौ अड़सठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २६८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)