यह निश्चित है कि जो लोग यज्ञ नहीं करते, उनके लिए न तो यह लोक सुखदायक है और न ही स्वर्ग। जो लोग वेदों में वर्णित विषयों के जानकार हैं, वे कर्म और निवृत्ति दोनों को ही प्रमाण मानते हैं।॥40॥
It is certain that neither this world nor heaven is pleasurable to those who do not perform sacrifices. Those who are knowledgeable about the subjects mentioned in the Vedas consider both action and retirement as proof. ॥ 40॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि गोकपिलीये अष्टषष्टॺधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २६८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें गोकपिलीयोपाख्यानविषयक दो सौ अड़सठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २६८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)