अत्र ते वर्तयिष्यामि प्रामाण्यमुभयोस्तयो:।
शृणुष्वैकमना: पार्थ च्छिन्नधर्मार्थसंशयम्॥ ४॥
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! मैं तुम्हें इन दोनों धर्मों की प्रामाणिकता सिद्ध करके दिखाऊँगा तथा धर्म और अर्थशास्त्र के विषय में तुम्हारे संशय दूर करूँगा। तुम एकाग्रचित्त होकर सुनो। 4॥
Kuntinandan! I will prove to you the authenticity of both these religions and will remove your doubts regarding religion and economics. You listen with concentration. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)