श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.268.34 
ब्राह्मणप्रभवो यज्ञो ब्राह्मणार्पण एव च।
अनुयज्ञं जगत‍् सर्वं यज्ञश्चानुजगत‍् सदा॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
यज्ञ वेदों के ब्राह्मण भाग से प्रकट हुआ है। वह यज्ञ केवल ब्राह्मणों को ही दिया जाता है। सारा संसार यज्ञ के पीछे है और यज्ञ सदैव संसार के पीछे रहता है। 34॥
 
Yagya has appeared from the Brahmin part of the Vedas. That yagya is offered only to Brahmins. The whole world is behind Yagya and Yagya is always behind the world. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)