Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.268.33: मैं ऋषियों द्वारा कहे गए उस आम्नाय (धर्मशास्त्र) को देखता हूँ, जिसमें समस्त वेद प्रतिष्ठित हैं। कर्म में प्रवृत्ति उत्पन्न करने वाले ब्राह्मण ग्रन्थ के वाक्यों को देखकर विद्वान् पुरुष उस ग्रन्थ को प्रामाणिक मानते हैं। 33॥ | mahabharat अध्याय 12.268: स्यूमरश्मि और कपिलका संवाद—स्यूमरश्मिके द्वारा यज्ञकी अवश्यकर्तव्यताका निरूपण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं ऋषियों द्वारा कहे गए उस आम्नाय (धर्मशास्त्र) को देखता हूँ, जिसमें समस्त वेद प्रतिष्ठित हैं। कर्म में प्रवृत्ति उत्पन्न करने वाले ब्राह्मण ग्रन्थ के वाक्यों को देखकर विद्वान् पुरुष उस ग्रन्थ को प्रामाणिक मानते हैं। 33॥
I look at the Amnaya (theology) stated by the sages, in which all the Vedas are established. Having seen the sentences of the Brahmin book which inculcates the inclination in action, learned men consider that book as authentic. 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥